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Tuesday, June 16, 2020

एक ख्याल | Sushant Singh Rajput | Actor |


एक ख्याल "सुशांत सिंह राजपूत" की मौत से


"एक ख्याल"

क्यूं ना स्कूल एक ऐसा भी खोला जाए
हो पढ़ाई  वह जहां चेहरे को समझने की
आज एक विज्ञापन ऐसा भी निकाला जाए
है ज़रूरत हमें टीचर की जो पढ़ाना जाने
कैसे जीना है हमें मुश्किलों और हालातों में
हंसते चेहरों के समझने का हुनर जिसमें हो
वह जो जिंदा हो मगर मौत से लड़कर तन्हा
ऐसा प्रिंसिपल भी उस स्कूल का खोजो यारों
हो पढ़ाई भी बहुत सख्त और बहुत ही उम्दा
एक गिनती ऐसी भी अब याद कराया जाए
एक मरते हैं तो मर जाते हैं ना जाने कितने
ऐसी मौतों के बहाने को अब गिनाया जाए
मिल नहीं जाती हैं हर शख्स को खुशियां सारी
ऐसी बातों को समझने का सलीका भी बताएं
वह किताबों का जो लेसन हो सबक आमोज़
हंसते चेहरों को समझने का तरीका जाने
वह छलकती है जो आंखों से हजारों खुशियां
ऐसी खुशियों को बचाने का हुनर भी जाने
हो जो दौलत वो बहुत और शोहरत की चमक
ऐसी दौलत से ही खुशियों को बचाने के लिए
हो एक एगज़ाम भी ऐसा खुशियां परखने के लिए
क्यूं ना आदमी को भी अब इंसान बनाया जाए
कच्चे धागों की मजबूती पे यकीं है जितना
पक्के रिश्तों की भी गहराई का अंदाज़ा कराया जाए
किस तरह हार के भी जीते हैं न जाने कितने
ऐसे लोगों की कहानी को सुनाया जाए
वह जो दौलत को ही समझे हैं सुकूं का सामान
ऐसी दौलत से भी बचने का तरीका जाने
वह जो सुनते हैं जमाने से बहुत सी बातें
ऐसी बातों को समझने का हुनर भी सीखें
करें कोशिश कभी ऐसी जो सभी याद रखें
ऐसी कोशिश को भी करने की शिक्षा दें हम
है डिप्रेशन एक बला जिसमें गिरफ्तार ना जाने कितने
ऐसी-जैैैसी ही बलाओं से रिहाई का तरीका जाने
एक हीरी जो कभी मौत से डरता ना हो
एक हीरो जो कभी दुश्मन से हारा ना हो
एक हीरो जो कर देता है अनहोनी को होनी
एक हीरो जो रहता है हमेशा हीरो बन कर
क्यूं ना एक फिल्म अब ऐसी भी बनाया जाए
ऐसी हीरो की कहानी को हकीकत भी बनाया जाए।

-Little-Star









Friday, March 27, 2020

Waqt


यह वक्त भी क्या वक्त है.......
अदाकार भी हम हैं दर्शक भी हम ही हैं
परेशान भी हम हैं खुश भी तो हम ही हैं
मरीज़ भी हम हैं मसीहा भी हम ही हैं
साहिल भी हम हैं तूफानं भी हम ही हैं
यह वक्त भी क्या वक्त है.........
दोस्त भी हम हैं दुश्मन भी हम ही हैं
मझदार भी हम हैं किनारा भी हम ही हैं
पराए तो पराए हैं पराए भी हम ही हैं
डरते तो हैं लेकिन बेखौफ भी हम ही हैं
यह वक्त भी क्या वक्त है........
मरहम भी हैं लेकिन ज़ख्म भी हम ही हैं
हम साथ भी हैं लेकिन दूर भी हम ही हैं
नेकी भी है लेकिन गुनहगार हम ही हैं
सिलते भी हमीं हैं उधड़ेरते भी हम ही हैं
यह वक्त भी क्या वक्त है.......
ईजाद भी हम से हैं और साइंस भी हम ही हैं
जमीं पर हम हैं चांद पर भी हम ही हैं
चलते वह जो हम हैं चलाते भी हम ही हैं
 ऐहसान है उसका मगर मगरूर भी हम ही हैं
यह वक्त भी क्या वक्त है......
कुदरत तो वह है और बंदे ही हम हैं
यह बात भी कुदरत ने क्या खूब बता दी
कुदरत वह जो उसकी है सब से बड़ी है
समझे वह जो हम हैं अंजान भी हम ही हैं
यह वक्त भी क्या वक्त है।

Little_Star

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