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Monday, July 6, 2020

Poetry on Sonu Sood | Aasmaa se Aage | Little_Star


                                   सोनू सूद





सोनू ओ सब के सोनू
कैसे वह सूद तेरा
हम सब अदा करेंगे
तूने किया जो सब का
बेलौस बेगरज़ से                                
कोई इसे है समझे 
मशहूरियत का तड़का
लेकिन वह काम तेरा
और वह लगन तुम्हारी
समझे वही है इसको
आंखों से जिसने देखा
कामों को तेरे देखा
कोशिश को तेरे माना
दुनिया ने जिसको देखा
तेरी वह टीम सोनू
लगती थी हमको ऐसी
जैसे कोई लड़ाई
लड़ने वह जा रहे हैं
करने फतह वह जैसे
कोई किला बड़ा सा
और फिर फतह किया भी
हर एक दिलों को तूने
सब के दिलों पे तूने
नेकी और प्यार के
झंडे लगा दिये हैं
हर कोई तकता ऐसे
जैसे कोई फरिश्ता
धरती पे आ गया हो
दिल को ना जाने कितने
उम्मीद को जगाया
उम्मीद भी वह ऐसी
 जिसको किया मुकम्मल
आंखें जो थक गयी थी
राहों को तकते-तकते
अपनों के इंतेज़ार में
और घर के दीदार में
तूने जो राह बनाई
राहें संवर गई है
हंसते हैं हर वह चेहरे
घर को जो जा रहे हैं
रस्ते भी देख सबको
यूं मुस्कुराए जा रहे हैं
जैसे कोई हो अपना
उसको गले लगा ले
तूने क्या जो सोनू
कैसे चुकाएं उसका
वह सूद जो है बाकी
वह मूल जो है बाकी।

-Little-Star



🖋️ नेकी करने के बहुत से रास्ते हैं। सोनू सूद के पास दौलत थी और उन्होंने अपनी दौलत का सही इस्तेमाल किया। जिसकी वजह से उन्होंने बहुत सारी दुआएं कमा ली।

🖋️ कहते हैं दौलत खत्म हो सकती है लेकिन दुआएं नहीं।

🖋️ सोनू सूद ने जितनी दौलत खर्च की उससे कहीं ज़्यादा दुआएं कमा लीं।

🖋️  कहते हैं दुआ से दौलत मिल सकती है लेकिन दौलत से दुआ नहीं। लेकिन आज सोनू सूद ने दौलत खर्च करके दुआएं अपने नाम कर गये।

🖋️ आप के पास जो हो उसी से दूसरों की मदद करें।

🖋️ किसी को सही राह दिखा देना, किसी को सही मशवरा दे देना या किसी के कुछ भी काम आ जाना भी एक नेकी है।

🖋️ अक्सर हम सोचते हैं कि हमारे पास देने के लिए कुछ नहीं। लेकिन हम गलत होते हैं क्योंकि हर किसी के पास कुछ ना होते हुए भी बहुत कुछ होता है।

🖋️  दुनिया में कमाने के लिए बहुत कुछ है। यह अलग बात है कि हम सिर्फ दौलत कमाना चाहते हैं।



🖋️ लॉकडाउन की वजह से लाखों मज़दूर जहां कहीं काम रहे थे फंस गये थे। क्योंकि कोरोनावायरस की वजह से सब काम बंद था। और ट्रांसपोर्ट भी बंद थे। और हर कोई घर जाना चाहता था। लेकिन लॉकडाउन की वजह से कोई कहीं आ-जा नहीं सकता था। ऐसे वक्त में जब मज़दूरों के पास अपने घर जाने का कोई रास्ता नहीं बचा तो मज़दूरों ने पैदल ही घर जाना शुरू कर दिया।

🖋️ तब सोनू सूद ने बस के जरिए से लोगों को उनके घर तक पहुंचाने का इरादा किया। और twitter पर उन्होंने अपना Whatsapp  नम्बर दिया कि जो कोई भी मुंबई से अपने घर जाना चाहता है वह सोनू सूद और उनकी टीम से सम्पर्क करे।

🖋️ इस काम को सोनू सूद और उनकी टीम ने बहुत अच्छे से किया। 

🖋️ सोनू सूद की वजह से ना जाने कितने ही प्रवासी अपने घर पहुंच पाए।

🖋️ सोनू सूद ने जो किया वह कहानी नहीं बल्कि हकीकत है और इस हकीकत से किसी को कोई इनकार नहीं।

-Little-Star






Sunday, April 12, 2020

Woh Ikkees(21) Din | Lockdown Poetry | Unlock Poetry | Little_Star



#covid_19

वो इक्कीस दिन........
बता गये बहुत कुछ
सिखा गये बहुत कुछ
भागते थे कभी हम
खुशियों के लिए
खुआहिशों के लिए
थी कभी फ़िक्र कपड़ों की
कभी बर्गर कभी पिज़्ज़ा
कभी बाहर के कॉफी की
ख्वाहिश थी तमन्ना थी
थी चिंता यह सब ही को ही
हो घर अच्छा और हो गाड़ी
कभी हम घूमने जाएं
कभी शिमला कभी लंदन
यही चिंता सभी को थी
कि हो दौलत बहुत सारी
यही कोशिश थी हम सब की
हो चाहे जितना जाएं थक
मगर हम को कमाना है
मगर फिर बदला ऐसा वक्त
मिला हमको समझने को
वो इक्कीस दिन.........
नहीं जाना था कहीं पर भी
ना आना था किसी को भी
है घर में जो भी पकता था
वह खाते थे सभी मिलकर
ना चिंता थी ही कपड़ों की
ना कैफे की ना होटल की
वह खाना जो कभी होटल से आता था
वह अब बनता था घर ही पर
वह जो पैसा तो बचता था
सेहत भी हो गयी बेहतर
वह जो खर्चा हज़ारों का
हज़ारों बच गये लेकिन
वो इक्कीस दिन.......
ना आएं फिर कभी लेकिन
मगर हो याद हम सबको
सबक वह जो पढ़ा सब ने
जिया जो ज़िन्दगी सब ने।

-Little-Star







Read More- The current post is continued in Khamoshiyon ko Shor
-Yeh Waqt bhi Guzar Jayega
-Housewife

Friday, March 27, 2020

Waqt


यह वक्त भी क्या वक्त है.......
अदाकार भी हम हैं दर्शक भी हम ही हैं
परेशान भी हम हैं खुश भी तो हम ही हैं
मरीज़ भी हम हैं मसीहा भी हम ही हैं
साहिल भी हम हैं तूफानं भी हम ही हैं
यह वक्त भी क्या वक्त है.........
दोस्त भी हम हैं दुश्मन भी हम ही हैं
मझदार भी हम हैं किनारा भी हम ही हैं
पराए तो पराए हैं पराए भी हम ही हैं
डरते तो हैं लेकिन बेखौफ भी हम ही हैं
यह वक्त भी क्या वक्त है........
मरहम भी हैं लेकिन ज़ख्म भी हम ही हैं
हम साथ भी हैं लेकिन दूर भी हम ही हैं
नेकी भी है लेकिन गुनहगार हम ही हैं
सिलते भी हमीं हैं उधड़ेरते भी हम ही हैं
यह वक्त भी क्या वक्त है.......
ईजाद भी हम से हैं और साइंस भी हम ही हैं
जमीं पर हम हैं चांद पर भी हम ही हैं
चलते वह जो हम हैं चलाते भी हम ही हैं
 ऐहसान है उसका मगर मगरूर भी हम ही हैं
यह वक्त भी क्या वक्त है......
कुदरत तो वह है और बंदे ही हम हैं
यह बात भी कुदरत ने क्या खूब बता दी
कुदरत वह जो उसकी है सब से बड़ी है
समझे वह जो हम हैं अंजान भी हम ही हैं
यह वक्त भी क्या वक्त है।

Little_Star

Read More- Aaj-Kal