Sunday, July 12, 2020

Amitabh Bachchan tests positive for Coronavirus| Abhishek Bachchan| Little_Star









अमिताभ बच्चन हुए कोरोना पाज़िटिव रेखा का बंगला हुआ सील, कल रात की यह बात सुन पढ़ कर हर किसी की जिज्ञासा का यह आलम था कि जैसे कोई नयी फिल्म रिलीज़ हो गई है और हर किसी को इस फिल्म की कहानी जानने की जल्दी थी। कि यह किस्सा क्या है।

और फिर हकीकत का पता लगते-लगते भी फसाना मशहूर हो चुका था। कि अमिताभ बच्चन कोरोना पाज़िटिव और रेखा का बंगला सील कर दिया गया है।

जब कि हकीकत कुछ और ही थी और वह हकीकत यह थी कि जिस दिन अमिताभ की रीपोर्ट पाज़िटिव आई उसी दिन रेखा के गार्ड की भी रीपोर्ट पाज़िटिव आई। और दोनों बातें इस तरह से शोशल मीडिया पर चलने लगीं जैसे कोई बहुत बड़े खज़ाने का राज़ पता चल गया हो। और राज़ भी ऐसा कि हर कोई इस राज़ को हर किसी को जल्द से जल्द बताना चाहता हो।





लेकिन यह बात बहुत ही अफसोस और गलत है कि किस तरह बड़ी ही आसानी से एक बात को किस्सा बना देते हैं यह जाने बिना कि हकीकत क्या है।

अमिताभ और रेखा की बातें किसी ज़माने में किसी फिल्म की कहानी से ज़्यादा चर्चा में रहती थी। यहां तक कि यह किस्सा भी मशहूर है कि रेखा अपनी मांग में अमिताभ बच्चन के नाम का ही सिंदूर लगाती हैं।

लेकिन कल की बात और आज की बात में बहुत फर्क है। आज अमिताभ बच्चन अगर दादा और नाना के पदवी के साथ किसी के ससुर भी हैं। और कोई समझदार इंसान अपने रिश्ते और मर्यादा को बखूबी समझता है।

अब अगर अमिताभ बच्चन के कोरोना पाज़िटिव होने की बात है तो हम यह बात आप को बता दें कि इस बात की जानकारी खुद अमिताभ बच्चन ने अपने ट्विटर अकाउंट से दी कि उनकी कोरोना की जांच पाज़िटिव आई है। और वह नानावती अस्पताल में भर्ती होने जा रहे हैं। उन्होंने यह भी लिखा कि फ़िक्र की बात नहीं है आप सब दुआएं करें ।





और फिर अमिताभ बच्चन के कोरोना पाज़िटिव की बात को सही होने के थोड़ी ही देर बाद एक और खबर चलने लगी कि अभिषेक बच्चन की रिपोर्ट भी पाज़िटिव आई है। और अमिताभ बच्चन और अभिषेक बच्चन दोनों नानावती अस्पताल ऐडमिट होने के लिए जा रहे हैं।



बात बहुत ही फ़िक्र थी लेकिन इन बातों को लेकर जो-जो बातें सामने आयीं उन बातों को सुनकर अफसोस भी हुआ और गुस्सा भी आया। क्योंकि एक तरफ जहां अमिताभ बच्चन के फैन दुख में दुआ और फ़िक्र कर रहे थे कि जल्द से जल्द अमिताभ बच्चन और अभिषेक बच्चन ठीक हो जाएं वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग इस को पब्लिसिटी स्टंट बता रहे थे। कि चर्चा में बने रहने और लोगों की सहानुभूति के लिए बिग बी यह सब कर रहे हैं।

आज पूरी दुनिया कोरोनावायरस की चपेट में है आज हर इंसान चाहे वह खास हो या आम इस बीमारी में मुब्तिला है। हां यह अलग बात है कि आज हज़ारों लाखों लोग इस बीमारी से ग्रस्त हैं। मगर कोई याद नहीं रखता। और कोई नामचीन हस्तियां का नाम किसी बात में आ जाए तो चर्चा फ़िक्र और बहस सब शुरू हो जाती है। 




अक्सर हम बहुत जल्द किसी को जज कर लेते हैं यह सोचे बिना कि हम जिस के बारे में बात कर रहे हैं वह किस मुश्किल दौर से गुज़र रहा है। और हमारी बातें किसी के दुखों को और बड़ा सकती हैं। यह सच है कि कोई किसी के दुख को कम नहीं कर सकता लेकिन हमको यह हक किसी ने नहीं दिया कि हम किसी के दुखों को बढ़ा दें। और आज हम यह कामना करते हैं कि यह कोरोना दौर से हम सब जल्द से जल्द बाहर आयें। और हम सब फिर से एक नये दौर की शुरुआत करें। जहां खुशी और आपसी मेल मुहब्बत के साथ हर कोई मिल जुल कर रहे।

-Little-Star







Monday, July 6, 2020

Poetry on Sonu Sood | Aasmaa se Aage | Little_Star


                                   सोनू सूद





सोनू ओ सब के सोनू
कैसे वह सूद तेरा
हम सब अदा करेंगे
तूने किया जो सब का
बेलौस बेगरज़ से                                
कोई इसे है समझे 
मशहूरियत का तड़का
लेकिन वह काम तेरा
और वह लगन तुम्हारी
समझे वही है इसको
आंखों से जिसने देखा
कामों को तेरे देखा
कोशिश को तेरे माना
दुनिया ने जिसको देखा
तेरी वह टीम सोनू
लगती थी हमको ऐसी
जैसे कोई लड़ाई
लड़ने वह जा रहे हैं
करने फतह वह जैसे
कोई किला बड़ा सा
और फिर फतह किया भी
हर एक दिलों को तूने
सब के दिलों पे तूने
नेकी और प्यार के
झंडे लगा दिये हैं
हर कोई तकता ऐसे
जैसे कोई फरिश्ता
धरती पे आ गया हो
दिल को ना जाने कितने
उम्मीद को जगाया
उम्मीद भी वह ऐसी
 जिसको किया मुकम्मल
आंखें जो थक गयी थी
राहों को तकते-तकते
अपनों के इंतेज़ार में
और घर के दीदार में
तूने जो राह बनाई
राहें संवर गई है
हंसते हैं हर वह चेहरे
घर को जो जा रहे हैं
रस्ते भी देख सबको
यूं मुस्कुराए जा रहे हैं
जैसे कोई हो अपना
उसको गले लगा ले
तूने क्या जो सोनू
कैसे चुकाएं उसका
वह सूद जो है बाकी
वह मूल जो है बाकी।

-Little-Star



🖋️ नेकी करने के बहुत से रास्ते हैं। सोनू सूद के पास दौलत थी और उन्होंने अपनी दौलत का सही इस्तेमाल किया। जिसकी वजह से उन्होंने बहुत सारी दुआएं कमा ली।

🖋️ कहते हैं दौलत खत्म हो सकती है लेकिन दुआएं नहीं।

🖋️ सोनू सूद ने जितनी दौलत खर्च की उससे कहीं ज़्यादा दुआएं कमा लीं।

🖋️  कहते हैं दुआ से दौलत मिल सकती है लेकिन दौलत से दुआ नहीं। लेकिन आज सोनू सूद ने दौलत खर्च करके दुआएं अपने नाम कर गये।

🖋️ आप के पास जो हो उसी से दूसरों की मदद करें।

🖋️ किसी को सही राह दिखा देना, किसी को सही मशवरा दे देना या किसी के कुछ भी काम आ जाना भी एक नेकी है।

🖋️ अक्सर हम सोचते हैं कि हमारे पास देने के लिए कुछ नहीं। लेकिन हम गलत होते हैं क्योंकि हर किसी के पास कुछ ना होते हुए भी बहुत कुछ होता है।

🖋️  दुनिया में कमाने के लिए बहुत कुछ है। यह अलग बात है कि हम सिर्फ दौलत कमाना चाहते हैं।



🖋️ लॉकडाउन की वजह से लाखों मज़दूर जहां कहीं काम रहे थे फंस गये थे। क्योंकि कोरोनावायरस की वजह से सब काम बंद था। और ट्रांसपोर्ट भी बंद थे। और हर कोई घर जाना चाहता था। लेकिन लॉकडाउन की वजह से कोई कहीं आ-जा नहीं सकता था। ऐसे वक्त में जब मज़दूरों के पास अपने घर जाने का कोई रास्ता नहीं बचा तो मज़दूरों ने पैदल ही घर जाना शुरू कर दिया।

🖋️ तब सोनू सूद ने बस के जरिए से लोगों को उनके घर तक पहुंचाने का इरादा किया। और twitter पर उन्होंने अपना Whatsapp  नम्बर दिया कि जो कोई भी मुंबई से अपने घर जाना चाहता है वह सोनू सूद और उनकी टीम से सम्पर्क करे।

🖋️ इस काम को सोनू सूद और उनकी टीम ने बहुत अच्छे से किया। 

🖋️ सोनू सूद की वजह से ना जाने कितने ही प्रवासी अपने घर पहुंच पाए।

🖋️ सोनू सूद ने जो किया वह कहानी नहीं बल्कि हकीकत है और इस हकीकत से किसी को कोई इनकार नहीं।

-Little-Star






Friday, June 26, 2020

Mirror (Woh Apni si Chawi) Little_Star





मिरर (वह अपनी सी छवि)

आईना बन के खड़ा था
तो निहारते थे सभी
देख के मुझे मुस्कुराता था कोई
तो कोई देख के उदास बहुत
सुलझ गयी ना जाने उलझी लटे कितनी
संवर गयी ना जाने दुल्हनें कितनी
मैं आईना ना जाने कितनें का
थी छवि मेरे अंदर ना जाने कितनों की
कभी टूटा जो दिल किसी का भी
वह आ के जुड़ता हमीं से था
कोई आंखों को तेरता था मुझे
कोई भवों को सिकोड़ता था बहुत
हर किसी के आंखों का काजल सवांरते थे हमीं
वह उन के होंठों की लाली हमें से थी
वह अश्क आ जो गया आंखों में कभी
नज़र बचा के सभी से नज़र मिलाते वह हमीं से थे
वह सुर्खियां तेरे हसीन गालों की
मुझे घंटों निहारने से हैं
बहुत चाहते थे हमें वह
बहुत निहारते थे हमें वह
मैं था भी तो उनका यह हक था ही उन्हें
मगर वह टूटा जो एक दिन दिल उनका
हुए गुस्से में वह बहुत अपसेट
वह उन के दर्द में नहीं वहां कोई अपना
वह बहुत अकेली और आईना अकेला मैं
वह तैश में थी बहुत और बहुत गमगीन
और मैं खामोश तमाशाई उनका
थे नहीं लफ्ज़ मेरे पास कोई उलफत के
मैं तो खामोशी का पैकर था अज़ल से ही यहां
मेरी खामोशी से आजिज़ आकर
वह मोबाइल जो मुझे तान के मारा उसने
था जो गुस्सा वह किसी का जो उतारा मुझ पे
मैं वह तन्हा सा अकेला सा मिमर बेचारा
मैं जो टूटा तो बहुत टूट के बिखरा एक दम
हां मगर टूट के यह बात को जाना हमने
ना कोई मरता है यहां कोई किसी के भी बिना
हर कोई जीता है यहां ज़िन्दगानी अपनी
संभल-संभल के करचियों को समेटा उसने
कोई अफसोस कोई उदासी ना थी उन को
फिर कहां हम और कहां का वह याराना
वह जो रहते थे बड़ी शान से हम वह तन्हा
था मगर अब मेरी जगह पे वहां तन के कोई और।

-Little-Star









Tuesday, June 16, 2020

एक ख्याल | Sushant Singh Rajput | Actor |


एक ख्याल "सुशांत सिंह राजपूत" की मौत से


"एक ख्याल"

क्यूं ना स्कूल एक ऐसा भी खोला जाए
हो पढ़ाई  वह जहां चेहरे को समझने की
आज एक विज्ञापन ऐसा भी निकाला जाए
है ज़रूरत हमें टीचर की जो पढ़ाना जाने
कैसे जीना है हमें मुश्किलों और हालातों में
हंसते चेहरों के समझने का हुनर जिसमें हो
वह जो जिंदा हो मगर मौत से लड़कर तन्हा
ऐसा प्रिंसिपल भी उस स्कूल का खोजो यारों
हो पढ़ाई भी बहुत सख्त और बहुत ही उम्दा
एक गिनती ऐसी भी अब याद कराया जाए
एक मरते हैं तो मर जाते हैं ना जाने कितने
ऐसी मौतों के बहाने को अब गिनाया जाए
मिल नहीं जाती हैं हर शख्स को खुशियां सारी
ऐसी बातों को समझने का सलीका भी बताएं
वह किताबों का जो लेसन हो सबक आमोज़
हंसते चेहरों को समझने का तरीका जाने
वह छलकती है जो आंखों से हजारों खुशियां
ऐसी खुशियों को बचाने का हुनर भी जाने
हो जो दौलत वो बहुत और शोहरत की चमक
ऐसी दौलत से ही खुशियों को बचाने के लिए
हो एक एगज़ाम भी ऐसा खुशियां परखने के लिए
क्यूं ना आदमी को भी अब इंसान बनाया जाए
कच्चे धागों की मजबूती पे यकीं है जितना
पक्के रिश्तों की भी गहराई का अंदाज़ा कराया जाए
किस तरह हार के भी जीते हैं न जाने कितने
ऐसे लोगों की कहानी को सुनाया जाए
वह जो दौलत को ही समझे हैं सुकूं का सामान
ऐसी दौलत से भी बचने का तरीका जाने
वह जो सुनते हैं जमाने से बहुत सी बातें
ऐसी बातों को समझने का हुनर भी सीखें
करें कोशिश कभी ऐसी जो सभी याद रखें
ऐसी कोशिश को भी करने की शिक्षा दें हम
है डिप्रेशन एक बला जिसमें गिरफ्तार ना जाने कितने
ऐसी-जैैैसी ही बलाओं से रिहाई का तरीका जाने
एक हीरी जो कभी मौत से डरता ना हो
एक हीरो जो कभी दुश्मन से हारा ना हो
एक हीरो जो कर देता है अनहोनी को होनी
एक हीरो जो रहता है हमेशा हीरो बन कर
क्यूं ना एक फिल्म अब ऐसी भी बनाया जाए
ऐसी हीरो की कहानी को हकीकत भी बनाया जाए।

-Little-Star









Thursday, June 11, 2020

Aag: The Fire | Hindi poetry | Little _Star



आग

वह आग जले तो उजाला घरों में होता है
वरना बुझे आग तो अंधेरा घरों में हो जाए
वह आग जले तो बुझे पेट की आग
वरना भूखे ही मर ना जाते वह सभी
वह आग ही तो है जो जलते हैं अपनों से
वरना हर कोई मिल-जुल के रहा ना करे
वह आग ही तो है जो जोशे-जुनूं बढ़ाता है
वरना थक-हार के कब के बैठ जाएं ना सभी
वह आग ही तो है जो मुहब्बत में होती है
वरना कोई किसी से क्या प्यार करे
वह आग ही तो है तप के बने सोना जिसमें
वरना सोना भी ना बिकता कोड़ियों में यहां
वह आग ही तो है जो बदले की जलती है
वरना हर शख्स चैन से जीता ना मिले
वह आग ही तो है जो निकल जाए पत्थर से
वरना माचिस की जरूरत किसे है यहां
वह आग ही तो है जो जलाती है तालीम की लै
वरना जिहालत की अंधेरी रात बहुत है यहां
वह आग ही तो है जो दिलों में जलती है
वरना हर शख्स जुदा ना होता किसी से यहां
वह आग ही तो है तो उगलती है ज़ुबां अक्सर
वरना हर बोल ना होती वह मिठास लिए
वह आग ही तो है जो नफरतें बढ़ाती है
वरना यह शहर तो मुहब्बत की मिसालें लिखता

-Little_Star



Monday, June 1, 2020

George Floyd थम गई सांसें.. | Little_Star

 






श्याम श्वेत की बात बहुत पुरानी है......
लेकिन हर युग में यह खुद को दोहराती है।
बात होती है जब भी इंसानों की, तो बात यह भी होती है कि वह कैसा था गोरा या काला।
क्यों नहीं इंसानों को उसके कर्म से आंका जाता?
क्यों शक्ल देख कर अच्छे या बुरे का सर्टिफिकेट दे दिया जाता है?
क्यों गोरे-काले के भेद में मन की सुन्दरता छिप जाती है?
गोरे-काले का भेद तो जन्म से ही शुरू हो जाता है। लेकिन यह भेद किसी के मौत का कारण बन सकता है यह शायद किसी ने नहीं सोचा होगा। 
जॉर्ज फ्लॉइड (George Floyd) को कल तक कौन जानता था?
लेकिन आज जॉर्ज फ्लॉइड (George Floyd) को हर कोई जानता है। लेकिन अफसोस यह जानना उस ना जानने से बेहतर था। क्योंकि जॉर्ज फ्लॉइड(George Floyd) आज इस दुनिया में नहीं हैं।
 अमेरिका जैसे देश के सड़क पर जॉर्ज फ्लॉइड (George Floyd) और पुलिस के बीच ना जाने क्या होता है कि कुछ ही पलों में जॉर्ज फ्लॉइड (George Floyd) की गर्दन उस पुलिस के घुटने से दबी होती है, और जॉर्ज फ्लॉइड के वह तकलीफदेह अल्फाज़ जिस को पढ़-सुन कर आज हर इन्सान के आंख में आंसू है। मगर उस पुलिस वाले को उस वक्त भी जॉर्ज फ्लॉइड (George Floyd) पर रहम नहीं आया जब जॉर्ज फ्लॉइड उससे कभी पानी मांग रहे थे तो कभी सांस ना ले पाने की तकलीफ़ तो कभी गर्दन और शरीर के दर्द को बर्दाश्त ना कर पाने के जुमले कह रहे थे।  लेकिन ना तो उस पोलीस वाले ने उनकी कोई मदद की और ना ही पुलिस के वह तीन साथी जो वहां पर उनके साथ रहते हुए भी कुछ नहीं कर पाए। और सिर्फ खामोश तमाशा देखते रहे। और लगभग सात मिनट के बाद जॉर्ज फ्लॉइड (George Floyd) खामोश हो गये।  

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लेकिन उन की खामोशी आज बहुत बड़े शोर में बदल चुकी है क्योंकि जॉर्ज फ्लॉइड (George Floyd) अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन उनकी मौत ने आज बहुत सारे सवाल खड़े कर दिए हैं और शायद उन सवालों के जवाब हर कोई जानना चाह रहा है।

आज अमरीका समेत पूरी दुनिया में जॉर्ज फ्लॉइड (George Floyd) की मौत के खिलाफ प्रदर्शन हो रहा है हर किसी के पास एक सवाल है और हर कोई अपने सवाल का जवाब चाहता है।
किसी भी इंसान को बेवजह मारना या किसी वजह के मारना दोनों मामलों में एक बीच का रास्ता ज़रूर ररखना चाहिए। जिससे कि मरने वाला और मारने वाला दोनों संतुष्ट हों।
जॉर्ज फ्लॉइड (George Floyd) के गलती की अगर बात करें तो क्या उनका काला होना ही उनकी सबसे बड़ी गलती थी तो यह उन की गलती नहीं क्योंकि इंसान की हर गलती माफ हो सकती है लेकिन बात जब रंग-रूप की होती है तो बात ही खत्म हो जाती है क्योंकि रंग-रूप कुदरत की देन है।



इस पोस्ट में लिखी गई बातें सोशल मीडिया के जरिए पढ़ी और देखे गये वीडियो के आधार पर लिखी गई हैं।
इस लेख को लिखने का मकसद यह है कि हर इंसान की ज़िंदगी बहुत कीमती है। 

-Little-Star

Saturday, April 18, 2020

Khamoshiyon ka Shor | Lockdown | COVID-19 | Little _Star




 खामोशियों का शोर

अभी कुछ दिन और रहना है घर ही पर
यह वक्त मुश्किल है मगर है काटना हमको
यह लॉकडाउन ज़रूरी है ज़िन्दगी के लिए
यह सच है कि किसी को पैसे की है दिक्कत
सामान मिल रहा है सभी को यह चिंता है मगर
पैसे जो जमा थे सबके अब हो रहे हैं खत्म वह
कुछ भी हो मगर लेकिन यह वक्त गुज़ारना है
यह दौर मुश्किल का बहुत और सब्र वाला
इस वक्त को गुज़ारो सब साथ ही में मिलकर
वह साथ भी हो ऐसा हों सब अलग-अलग
आई बड़ी मुसीबत जिसको है काटा सबने
यह बात बता रहे हैं दादी किसी की नानी
हम को भी है समझना वह बात बुज़ुर्ग से
जो उनकी ज़िंदगी ने तजुर्बे से है कमाई
है ज़िन्दगी हमारी तो सोचना भी हमें है
जो ज़िन्दगी रही तो लाखो कमा हैं लेंगे
जो ज़िन्दगी रही तो सब कुछ बना ही लेंगे
वह सुनते हैं जो बड़ों से कहते हैं वह यह अक्सर
उम्मीद हो बड़ी तो सब कुछ यहां है मुमकिन
उम्मीद का दिया एक लाखों दिये जला दे
उम्मीद का दिया एक दिल में जला के रख लो।

-Little-Star



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Sunday, April 12, 2020

House wife | working Women | Little_Star


हाउस वाइफ......

इस लॉकडाउन यह जाना सब ने.......
वह हाउस वाइफ जो
करती है काम बहुत कुछ
न देखा कभी उसे था
न समझा कभी उसे था
वरना मशहूर तो यही था
तुम करती भी क्या हो आखिर
जो देखा तो यह ही सोचा
करती कमाल तुम हो
बंदी हो बेमिसाल तुम।

-Little-Star






Woh Ikkees(21) Din | Lockdown Poetry | Unlock Poetry | Little_Star



#covid_19

वो इक्कीस दिन........
बता गये बहुत कुछ
सिखा गये बहुत कुछ
भागते थे कभी हम
खुशियों के लिए
खुआहिशों के लिए
थी कभी फ़िक्र कपड़ों की
कभी बर्गर कभी पिज़्ज़ा
कभी बाहर के कॉफी की
ख्वाहिश थी तमन्ना थी
थी चिंता यह सब ही को ही
हो घर अच्छा और हो गाड़ी
कभी हम घूमने जाएं
कभी शिमला कभी लंदन
यही चिंता सभी को थी
कि हो दौलत बहुत सारी
यही कोशिश थी हम सब की
हो चाहे जितना जाएं थक
मगर हम को कमाना है
मगर फिर बदला ऐसा वक्त
मिला हमको समझने को
वो इक्कीस दिन.........
नहीं जाना था कहीं पर भी
ना आना था किसी को भी
है घर में जो भी पकता था
वह खाते थे सभी मिलकर
ना चिंता थी ही कपड़ों की
ना कैफे की ना होटल की
वह खाना जो कभी होटल से आता था
वह अब बनता था घर ही पर
वह जो पैसा तो बचता था
सेहत भी हो गयी बेहतर
वह जो खर्चा हज़ारों का
हज़ारों बच गये लेकिन
वो इक्कीस दिन.......
ना आएं फिर कभी लेकिन
मगर हो याद हम सबको
सबक वह जो पढ़ा सब ने
जिया जो ज़िन्दगी सब ने।

-Little-Star







Read More- The current post is continued in Khamoshiyon ko Shor
-Yeh Waqt bhi Guzar Jayega
-Housewife

Yeh Kaisi Aastha | Story | Little_Star





यह कैसी आस्था.......

कहते हैं ईश्वर अल्लाह में विश्वास मन से होता है।
और यह मन ही है जो हमारी आस्था को ईश्वर अल्लाह से जोड़े रहता है।
आस्था दिल से होनी चाहिए और दिल में आस्था होनी चाहिए।
एक इंसान का अल्लाह ईश्वर पर यह विश्वास होना कि वह मेरे साथ कभी कुछ बुरा नहीं होने देगा।
और यह विश्वास बहुत अटूट भी है।
क्योंकि ऊपर वाला अपने बंदों के साथ कभी बुरा नहीं कर सकता।
कहते हैं जब कभी आप के साथ बुरा होता है तो यह विश्वास भी होता है कि ज़रूर इसके पीछे कुछ ऐसा है जो मेरे लिए बहुत अच्छा है।
आज पूरी दुनिया में कोरोनावायरस का कहर है हर किसी को इससे बचने के लिए घर में रहने की सलाह दी जा रही है।
बहुत सारे देशों में लॉकडाउन है किसी को घर से नहीं निकलना है।
और हम देख-सुन और पढ़ रहे हैं कि बहुत सारे देशों में लॉकडाउन का बहुत सख्ती से पालन हो रहा है। और यह सख्ती वहां का प्राशासन नहीं बल्कि वहां के रहने वाले लोग कर रहे हैं।
लेकिन भारत में इस लॉकडाउन का उतनी सख्ती से पालन नहीं हो रहा है जितनी सख्ती से इसका पालन होना चाहिए।
लोगों को यह बात नहीं समझ आ रही है कि कोरोनावायरस से बचने का सबसे पहला बड़ा तरीका घर में रहना है जिससे हम कोरोनावायरस से खुद भी बच सकते हैं और दूसरों को भी बचा सकते हैं।
लेकिन आज कुछ लोग ये सोच कर घर से बाहर निकल रहे हैं कि उनको कुछ नहीं हो सकता उनका भगवान अल्लाह उनको कुछ नहीं होने देगा।
जब हम इस तरह की बातें सुनते हैं तो मन में एक कहानी घूम जाती है जो हम ने कभी कहीं पढ़ी थी और कई बार पढ़ी थी।
कहानी यह थी कि..........
एक बिरजू नाम के शख्स को ईश्वर पर बहुत विश्वास था उसको लगता था कि उसके साथ कुछ भी बुरा नहीं हो सकता और वह इसी विश्वास में जीता था।
एक बार उसके गांव में बहुत भयंकर बाढ़ आ गयी।
सब लोग गांव छोड़ कर जाने लगे।
सब ने बिरजू से भी गांव छोड़ कर चलने के लिए कहा।
मगर बिरजू ने कहा कि उसको कुछ नहीं हो सकता ईश्वर उसको बचा लेगा।
और वह गांव में ही रहा।
बाड़ बहुत ज़्यादा बढ़ गई सेना के जवान कश्ती से लोगों को गांव से बाहर निकाल रहे थे।
सेना के जवान बिरजू के पास भी आये और गांव छोड़ कर चलने के लिए कहा मगर बिरजू ने कहा कि उसको कुछ नहीं हो सकता ईश्वर उसको बचा लेगा और वह नहीं गया।
बाड़ का पानी घर के अंदर तक आ गया।
बिरजू घर की छत पर चढ़ गया।
पानी बहुत ज़्यादा बढ़ जाने की वजह से सेना के जवान हवाई जहाज़ से गांव के बचे हुए लोगों को बाहर निकाल रहे थे।
हवाई जहाज़ बिरजू की छत के पास भी आया और सेना के जवान ने साथ चलने के लिए कहा।
लेकिन बिरजू ने फिर वही बात कही कि उसको कुछ नहीं हो सकता ईश्वर उसको बचा लेगा।
सिपाहियों ने चलने के लिए बहुत कहा लेकिन बिरजू जाने के लिए तैयार नहीं हुआ।
और वह उसी तरह घर की छत पर रहा।
गांव के सभी लोग लगभग गांव से जा चुके थे।
और फिर बाढ़ में बिरजू का घर भी बह गया और साथ में बिरजू भी मर गया।
मरने के बाद बिरजू को ईश्वर के पास ले जाया गया।
बिरजू बहुत ही गुस्से में ईश्वर के पास गया।
और कहा कि मैंने आप पर कितना विश्वास किया लेकिन आप ने मेरे विश्वास को तोड़ दिया।
आपने मुझे क्यों नहीं बचाया?
क्यों मुझे मरने दिया?
बिरजू की बातें सुनकर ईश्वर मुस्कुराऐ।
और बोले.....
तुम्हें क्या लगता है वह सेना,वह कश्ती, और वह हवाई जहाज़ किस ने भेजा था।
यहां पर यह कहानी लिखने का मकसद सिर्फ यह है कि आज जो लोग कोरोनावायरस के चलते घर से बेकार में निकल रहे हैं और वही बात कह रहे कि मुझे कुछ नहीं हो सकता।
तो यह आस्था नहीं बल्कि नादानी है।

-Little-Star


बिरजू-काल्पनिक नाम




Yeh Waqt Bhi Guzar Jayega | Story | Little_Star



यह वक्त भी गुज़र जाएगा.....
एक कहानी कभी पढ़ी थी।
शायद आपने भी पढ़ी हो।
एक राजा और उसके वज़ीर की कहानी है।
वह वज़ीर जो बहुत अक्लमंद और होशियार था।
एक बार राजा ने वज़ीर से कहा किt कुछ ऐसा बताओ कि जिससे मैं दुःख में भी खुश हो जाऊं।
वज़ीर ने राजा को एक का काग़ज़ पर कुछ लिख कर दिया और कहा कि जब आप बहुत मुश्किल में हों तभी उसको पढ़ना।
एक बार की बात है राजा कहीं जंगल में अपने सिपाहियों के साथ जा रहे थे।
रास्ते में किसी तरह वह अपने सिपाहियों से अलग हो गये।
शाम का समय था राजा अब यही सोच रहे थे कि अब वह महल तक वापस कैसे जाएंगे।
राजा बहुत परेशान हो गए उनको कुछ समझ नहीं आ रहा था।
वह वहीं पर एक पत्थर पर बैठ गए।
रात का अंधेरा बढ़ता जा रहा था राजा को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था।
और फिर उनको अपना वज़ीर याद आ गया कि वह अगर आज उनके साथ होते तो वह इस तरह अकेले जंगल में ना बैठे होते।
और फिर वज़ीर का सोचते-सोचते राजा को वज़ीर का वह लिखा हुआ काग़ज़ याद आया जो वज़ीर ने उन्हें देते समय कहा था कि जब आप मुश्किल में हों तभी इसे पढ़ना।
राजा जो इस वक्त जंगल में  मुश्किल में थे उन्होंने अपनी जेब से वह काग़ज़ निकाला और उसको खोल कर पढ़ा।
और उसको पढ़ते ही राजा के होंठों पर मुस्कान आ गई।
ऐसा लग रहा था कि अब राजा को कोई परेशानी नहीं है।
और राजा वहीं पर आराम करने के लिए  लेट गए। और कब राजा को नींद भी आ गई राजा को पता ही नहीं चला।
सुबह राजा के सिपाही राजा को ढूंढ़ते-ढूंढते आखिर राजा तक पहुंच गये।
और फिर सबके साथ राजा अपने महल चले आए।
महल पहुंच कर सब राजा का हाल जानने को बेताब थे कि किस तरह राजा ने वह रात जंगल में अकेले गुज़ारी।
और फिर राजा ने सारी बात बताई कि किस तरह वह काग़ज़ पढ़ने के बाद उनके अंदर सुकून आया।
हर कोई यह जानने के लिए बेचैन था कि आखिर उस कागज़ पर लिखा क्या था।
और फिर राजा ने अपनी जेब से वह काग़ज़ निकाला और उसको सबके सामने रख दिया।
जिस पर लिखा था.....
यह वक्त भी गुज़र जाएगा।
आज कोरोनावायरस की वजह से पूरी दुनिया मुश्किल में है। हर कोई परेशान है हर कोई घर में रहने को मजबूर है। क्योंकि घर में रहने से ही हम सब इस वाइरस से बच सकते हैं।
आज बहुत सारे परिवार घर में एक साथ हैं। वक्त मुश्किल का है मगर शुक्र है जो परिवार आज साथ में घर में हैं।
क्योंकि आज ना जाने कितने ही लोग इस लॉकडाउन की वजह से अपने घर तक नहीं पहुंच पाए।
आज कितनों के पास खाने को नहीं है।
जो रोज़ कमाते और रोज़ खाते थे उनके लिए यह एक आज़माइश है।
आज आज़माइश हर किसी है
आज डॉक्टर और नर्स को अपना फ़र्ज़ निभाना है। तो वहीं पुलिस और हमारे देश के जवान को हमारी और हमारे देश की रक्षा करना है।
आज हर कोई मुश्किल में है और हर कोई जल्द से जल्द इस दौर से बाहर आना चाहता है।
इस मुश्किल हालात से गुज़रते हुए हर किसी के सामने कागज़ का वही तुकड़ा है और सब के ज़ुबान पर एक ही शब्द है.......
यह वक्त भी गुज़र जाएगा।

-Little-Star







Friday, April 10, 2020

Judaai |Letter Life | Digital Life | Digital Love | Little_Star




जुदाई......
एक खत जो लिखा उसको
खुशियों के झरोखों से
लफ्ज़ो के नगीनों से
हर लफ्ज़ महकते थे
हर शब्द खनकते थे
बातें जो बहुत सी थी
लिख सब भी रहे थे वह
फूलों की नगरया से
खुशबू की सियाही से
रंगों के धनक भी थे
चुनरी की लगन भी थी
ज़ेवर की चमक थी ही
चूड़ी की खनक भी थी
हर बात मुकम्मल थी
और खत भी मुकम्मल था
जो नाम लिखा उसका
और खत को जो मोड़ा था
वह दर्द जो दिल में था
आंखों में समाया था
लफ़्ज़ों से बचाया था
पलकों से छिपाया था
एक अश्क जो छलका था
आंखों के किनारे से
एक बूंद ही काफी था
जो आंख से टपका था
और खत पे जो फैला था
एक बूंद ही भारी था
एक पन्ने के लेटर पे
एक बूंद ही भारी था।

#Little_Star












इमोजीज़ लाइफ......

यह दौर नहीं है खत का शायद
Massage का ज़माना है
Fb और insta की कहानी है
मैसेज लिखते हैं मुहब्बत का वह
और कर देते हैं delete all  भी
आज वह कहां और तुम कहां
हर तन्हाई का साथी है यहां
याद उनकी जो आ जाए कभी
Watsapp और massenger है ना
बातें वह जो दिल की है हो जाती यहां अक्सर
कभी voice तो कभी video call से
कहने को तो हर बात ही हो जाती है मुकम्मल
कहना ना यहां हम को कुछ भी ना अगर हो
है रास्तें और भी इन सब के सिवा
हर बात की हर सोच की हर याद की यहां
हर चीज़ की हर फेस की हर काम की यहां
है नाम यहां उसका Emoji कभी smile
है नाम तो इमोजी मगर काम बहुत हैं
एक बात जो कहना है तो सौ रास्ते यहां
हूं सोचती फिर भी मैं यह बातें अक्सर
हर काम मुकम्मल है हर बात मुकम्मल
करना जो कभी चाहें, बातें वह कभी मन की
लफ़्ज़ों की कमी जब हो कहना भी ज़रूरी हो
हो बात जो कुछ कहना कह फिर भी ना पाते हो
ऐसे में इमोजी ही फिर साथ निभाता है
यह सच है मुहब्बत की Emoji है बहुत लेकिन
जो बात रहती है काग़ज़ पे कलम से लिख कर के
वह बात नहीं लेकिन message की लिखावट में
वह बात नहीं रहती इमोजी की इमोजी में
वह खत तो सदा रहते यादों में निगाहों में
Message तो बहुत जल्दी हो जाते clear chat
काग़ज़ के वह खत तो संजोय बहुत जाते
है आज ना मुहब्बत वह और ना वह ज़माना
है आज बहुत जल्दी जीने के तरीके हैं
है आज मुहब्बत जो हो जाती बहुत जल्दी
और फिर यह मुहब्बत है टूट भी जाती है
है आज कहां वह रिश्ते और बात कहां की वह निभाना
फुर्सत कहां किसको रिश्तों को बनाने की
फुर्सत कहां हमको रिश्तों को निभाने की

-Little-Star



Friday, April 3, 2020

Aaj-Kal | Life in Lockdown | Little_Star


#coronavirus

बड़ी ही सादा ज़िन्दगी है आज-कल
सब मिलजुल कर पकाते हैं
और मिलजुल कर ही खाते हैं
सब साथ में हैं रहते
किसी को कहीं जाने की जल्दी नहीं
किसी को किसी से कोई काम नहीं
सब अपना काम खुद ही करते
साथ-ही-साथ सब का काम भी करते
न किसी को नये कपड़े की फ़िक्र
ना किसी को मॉल जाने की इच्छा
सब लोग हैं घर में
और कर रहे वह काम
जो करने की इच्छा थी बरसों से मन में
मगर वक्त नहीं था किसी के पास
सुबह का नाश्ता साथ में हो रहा है
दोपहर का खाना जो खाते नहीं साथ
आज हर काम हो रहा है साथ
अब शाम की चाय भी एक बार ही बन रही
वरना कौन कब आये ये सोच के एक-एक कप ना जाने कितनी बार बनती।
बाप बेटा कैरम भी खेल रहे हैं
क्या सास और क्या बहू ताश की बाज़ी लगी है सबकी।
घर का काम हो रहा जल्दी, क्योंकि सब मिलजुल हैं कर रहे
कभी कोई पकैड़े तल कर वाह वाही ले रहा
कभी कोई सब्ज़ी काट कर ही कॉलर को अकड़ा रहा
जिस को नहीं आ रहा कुछ भी
वह भी नहीं है आज पीछे
नहीं आता तो क्या हुआ सीख लेंगे आज हम भी
कोई रोटी को इंडिया गेट बना कर ही खुश है
तो कोई चावल की खिचड़ी पका के है हंस रहा
यह वक्त है मुश्किल लेकिन फिर भी
सब खुश हैं और साथ है
आज जो वक्त है कल वह नहीं रहेगा
जानो इसे गनीमत कर लो हो जो भी करना
यह वक्त बुरा बहुत है
लेकिन समझ यह सबको
अच्छे से आ गया है
मिलकर रहें जो हम सब
तो कुछ भी बुरा नहीं है।

#Little_Star


Read More- Woh Ikkees(21) Din


Friday, March 27, 2020

Waqt | Lockdown Poetry | Hindi poetry | Little_Star


यह वक्त भी क्या वक्त है.......

अदाकार भी हम हैं दर्शक भी हम ही हैं

परेशान भी हम हैं खुश भी तो हम ही हैं

मरीज़ भी हम हैं मसीहा भी हम ही हैं

साहिल भी हम हैं तूफानं भी हम ही हैं

यह वक्त भी क्या वक्त है.........

दोस्त भी हम हैं दुश्मन भी हम ही हैं

मझदार भी हम हैं किनारा भी हम ही हैं

पराए तो पराए हैं पराए भी हम ही हैं

डरते तो हैं लेकिन बेखौफ भी हम ही हैं

यह वक्त भी क्या वक्त है........

मरहम भी हैं लेकिन ज़ख्म भी हम ही हैं

हम साथ भी हैं लेकिन दूर भी हम ही हैं

नेकी भी है लेकिन गुनहगार हम ही हैं

सिलते भी हमीं हैं उधड़ेरते भी हम ही हैं

यह वक्त भी क्या वक्त है.......

ईजाद भी हम से हैं और साइंस भी हम ही हैं

जमीं पर हम हैं चांद पर भी हम ही हैं

चलते वह जो हम हैं चलाते भी हम ही हैं

 ऐहसान है उसका मगर मगरूर भी हम ही हैं

यह वक्त भी क्या वक्त है......

कुदरत तो वह है और बंदे ही हम हैं

यह बात भी कुदरत ने क्या खूब बता दी

कुदरत वह जो उसकी है सब से बड़ी है

समझे वह जो हम हैं अंजान भी हम ही हैं

यह वक्त भी क्या वक्त है।



Little_Star

Waqt


यह वक्त भी क्या वक्त है.......
अदाकार भी हम हैं दर्शक भी हम ही हैं
परेशान भी हम हैं खुश भी तो हम ही हैं
मरीज़ भी हम हैं मसीहा भी हम ही हैं
साहिल भी हम हैं तूफानं भी हम ही हैं
यह वक्त भी क्या वक्त है.........
दोस्त भी हम हैं दुश्मन भी हम ही हैं
मझदार भी हम हैं किनारा भी हम ही हैं
पराए तो पराए हैं पराए भी हम ही हैं
डरते तो हैं लेकिन बेखौफ भी हम ही हैं
यह वक्त भी क्या वक्त है........
मरहम भी हैं लेकिन ज़ख्म भी हम ही हैं
हम साथ भी हैं लेकिन दूर भी हम ही हैं
नेकी भी है लेकिन गुनहगार हम ही हैं
सिलते भी हमीं हैं उधड़ेरते भी हम ही हैं
यह वक्त भी क्या वक्त है.......
ईजाद भी हम से हैं और साइंस भी हम ही हैं
जमीं पर हम हैं चांद पर भी हम ही हैं
चलते वह जो हम हैं चलाते भी हम ही हैं
 ऐहसान है उसका मगर मगरूर भी हम ही हैं
यह वक्त भी क्या वक्त है......
कुदरत तो वह है और बंदे ही हम हैं
यह बात भी कुदरत ने क्या खूब बता दी
कुदरत वह जो उसकी है सब से बड़ी है
समझे वह जो हम हैं अंजान भी हम ही हैं
यह वक्त भी क्या वक्त है।

Little_Star

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